अखिलेश का एक मंत्री चाय पिलाने के लिए खुद भैंस दुहता है

बहराइच-बहराइच में दरगाह है. सैयद सालार मसूद गाजी की. कहते हैं कि अफगानिस्तान के महमूद गजनवी का भांजा गाजी लड़ाइयां लड़ते हुए, यहां तक आया थे . गाजी के नाम पर दरगाह कब बनी, क्यों बनी, इससे किसी को मतलब नहीं है. दरगाह पर हिंदू-मुस्लिम समान आस्था से आते हैं. आस्था से ज्यादा वो उस मेले के चलते आते हैं, जो साल भर में एक बार ठेठ जेठ की गरमी में एक महीने तक चलता है. इसमें बहुत दूर-दूर से लोग आते हैं
इतनी भीड़ होती है कि हर बार मेला खत्म होने के बाद महीनों तक स्थानीय लोग शिकायत करते हैं कि मेले की वजह से रिक्शे वालों ने दाम दोगुने कर दिए हैं. ये अलग बात है कि करीब एक किलोमीटर की दूरी का रिक्शावाले 10 रुपया लेते हैं. दरगाह के 

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