मीडिया घराने या मीडिया के डेरे

फ़ज़ल इमाम मल्लिक

कभी पत्रकारिता भले मिशन रही होगी लेकिन अब तो यह खालिस धंधा बन गया है. टीआरपी का खेल. एक लगाओ चार पाओ. घटनाएं अब रची जाती हैं और उनमें खबरों को अपने तरीके से परोसा जाता है. देखो और दिखलाओ. यानी सच के मुलम्मे में झूट बेचने की कवायद. और यह झूट तब तक बेचते रहो जब तक दूसरा झूट सच बन कर सामने खड़ा न हो जाए...गुरमीत राम रहीम से लेकर स्वामी ओम तक

News Posted on: 03-11-2017
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