कांग्रेस के लिए चित्रकूट उपचुनाव के नतीजे का मतलब,शिवराज के लिये होगी मुसीबत

फ़ज़ल इमाम मल्लिक

चित्रकूट के घाट पर संतन की भीड़ तो नहीं लगी थी, नेताओं की जरूर लगी थी. मौका चित्रकूट विधानसभा के उपचुनाव का था. नतीजे भाजपा और खास कर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है. सत्ताधारी दल उपचुनाव हार जाए ऐसा बहुत कम होता है लेकिन मध्यप्रदेश में ऐसा हुआ है तो जाहिर है कि इसके लिए कोई एक शख्स जिम्मेदार है तो वे हैं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान. क्योंकि चित्रकूट के उपचुनाव को शिवराज सिंह ने अपनी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा सो जोड़ डाला था. वे तीन दिन लगातार चित्रकूट में जमे रहे और एक रात तो एक गांव में आदिवासी के घर में भी बिताया. लेकिन मतदाताओं पर इसका कोई असर नहीं दिखा और उस गांव में भी कांग्रेस भाजपा से दोगुने वोट ज्यादा ले उड़ी.

चुनाव में भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी. मुख्यमंत्री के साथ-साथ आधा दर्जन मंत्री चित्रकूट में डेरा डाले हुए थे. लेकिन सारी तदबीरें उलटी पड़ गईं. दरअसल व्यापम मामले में जिस तरह शिवराज की किरकिरी हुई है. वह दाग छूटे नहीं छूट रहे हैं. रही सही कसर उनके बड़बोलेपन ने पूरी कर दी है. हाल ही में अमेरिकी दौरे पर वे गए थे. अमेरिका प्रवास के दौरान उन्होंने अपनी पीठ थपथपाते हुए कहा था कि मध्यप्रदेश की सड़कें तो अमेरिका से बेहतर हैं. इस प उनका खूब मजाक भी उड़ाया गया था लेकिन वे अपनी बात पर अडिग रहे थे.

भाजपा के लिए हार इसलिए और ज्यादा परेशानी भरी है क्योंकि अंतर चौदह हजार से ज्यादा मतों का है. यह सही है कि यह सीट कांग्रेस की परंपारागत सीट रही है. 2008 का चुनाव छोड़ दिया जाए तो यहां से कांग्रेस कभी हारी नहीं है. भाजपा यह कह कर अपना गम गलत कर सकती है लेकिन सच तो यह है कि यह हार काफी दिनों तक शिवराज को सालती रहेगी. उन्होंने जीत के ले हर घोड़े खोल दिए थे. लेकिन मतदाताओं के मूड को परखने में वे नाकाम रहे. नतीजा सामने है. कांग्रेस के नीलांशू चतुर्वेदी ने भाजपा के शंकर दयाल त्रिपाठी को 14333 वोटों से हराया. वोटों की गिनती के दौरान लोगों की दिलचस्पी उस तुर्रा गांव के नतीजों पर ज्यादा थी जहां शिवराज सिंह चौहान ने आदिवासी लालमन गौंड़ के यहां रात गुजारी थी. हालांकि रात गुजारने के लिए सरकार ने हर तरह की सुविधाओं का इंतजाम किया था ताकि मुख्यमंत्री चैन से सोएं. यह बात दीगर है कि दूसरे ही रोज सारी सुख-सुविधाएं छीन ली गईं. यहां भाजपा को 203 और कांग्रेस को 413 वोट मिले. इससे शिवराज की लोकप्रियता का पता लगाया जा सकता है.

नतीजे से कांग्रेसी बमबम हैं. प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में तो नारे भी बदल गए. कांग्रेसियों ने -भाजपा का हो गया काम, जय श्रीराम का नारा लगा कर भाजपा को उसी के तरीके से जवाब दिया. दरअसल ऐसी मान्यता है कि भगवान राम ने वनवास काल के दौरान लगभग बारह साल चित्रकूट में ही काटे थे.

इस लिहाज से इसका धार्मिक महत्त्व भी है और भगवान राम से जुड़े होने की वजह से भाजपा जीत के दावे कर रही थी. लेकिन नतीजा कांग्रेस के पक्ष में गया. कांग्रेस अब भाजपा को एक तरह से चिढ़ा रही है. कांग्रेस का कहना है कि हम भगवान राम के सच्चे उपासक हैं और वे भी सही व सच्चे लोगों का साथ देते हैं. मध्यप्रदेश में अगले साल विधान सभा के चुनाव होने हैं. अगले महीने गुजरात में चुनाव होने जा रहा है. कांग्रेस के लिए यह जीत टानिक का काम करेगी.

News Posted on: 13-11-2017
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